AI ने 19 साल पहले हुए मर्डर केस के आरोपी पकड़वा दिए

Ai कमाल की चीज़ है कितनी कमाल की चीज़।

इतनी की जो काम पुलिस 19 सालों में नहीं कर सकी वो काम AI के मदद से हो गया। दो आरोपी खतरनाक जो मंसूबे वाले आरोपी थे और उन्होंने जो खतरनाक घटना को अंजाम दिया उसके आरोपी 19 सालों से फरार थे।

चेहरा बदल लिया, भेष बदल लिया। उमर बीत गई, समय बीत गया और वो लापता हो गए। कहानी कहाँ से शुरू होती है? 10 फरवरी 2006 केरल कुल्लम इलाका तिरुवनंतपुरम से करीब 70 किलोमीटर दूर वहाँ एक लड़की है रंजनी।

रंजनी को प्यार होता है। पड़ोस के भारतीय सेना INDIAM ARMY POSTED थी, पंजाब के पठानकोट में तैनाती थी। दोनों के बीच प्यार था, रिलेशनशिप बना रिश्ते बने। इसी दौरान रंजनी प्रेग्नेंट हो गई। रंजनी और के बीच तनाव बढ़ा, रिश्ता खत्म होने की नौबत आ गई या कहें खत्म हो गया। दविल वापस अपनी नौकरी पर चला गया।

दूसरी तरफ रंजनी ने बच्चे को जन्म देने का फैसला किया और साथ में स्टेट वीमेन कमिशन से दविल को मिलिट्री से वापस आकर DNA TEST कराने का ऑर्डर भी भिजवा दिया। क्यों भिजवाया? क्योंकि दविल के परिवार वालों ने और उसने दविल के आसपास के लोगों ने?

कैरेक्टर असोसिएट किया था। रंजनी का इस ऑर्डर के पीछे ये कहानी रंजनी की माँ संतम्मा इंडियन एक्सप्रेस को बताती है। दविल  कुमार उसकी फैम्ली ने मेरी बेटी के चरित्र पर सवाल उठाए थे। इसी वजह से वो चाहती थी कि दविल  का डीएनए टेस्ट हो। जनवरी 2006 रंजनी की डेलिवरी हुई, उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया

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और तभी दविल  के दोस्त राजेश की केस में एंट्री हुई। वो भी इंडियन आर्मी में था। कुन्नूर के श्रीकांतपुरम का रहने वाला राजेश दविल  के साथ वहीं पे पोस्टेड था। पुलिस के अनुसार।

वहीं पर इन दोनों ने रंजनी को मारने का प्लान बनाया है। राजेश ने रंजनी से अपनी असली पहचान छिपाई और खुद को अनिल कुमार बताया और खुद को कोल्लम का ही बताया। पुलिस के अनुसार जब रंजनी हॉस्पिटल से रिलीज़ हो गई थी, उस वक्त राजेश उर्फ अनिल ने।

रंजनी को उसके घर से दूर एक किराये का मकान दिलाया और फिर 10 फरवरी 2006 को राजेश ने रंजनी की माँ संतम्मा माँ को बच्चों के जन्म से जुड़ी APPLICATION जमा करने के लिए लोकल पंचायत OFFICEभेज दिया। देवेल के कहने पर राजेश ने रंजनी पर चाकू से हमले किए।

और दोनों नवजात बच्चों का गला काट दिया। दुर्दांत हत्याकांड ट्रिपल मर्डर राजेश के बारे में इंडियन एक्सप्रेस से संतम्मा बोली उनकी माँ राजेश खुद को अनिल कुमार बताकर हॉस्पिटल में हमारा दोस्त बना। उसने हमसे संपर्क कर ये पूछा कि रंजनी की सी सेक्शन डेलिवरी के लिए?

हमको खून की खून की जरूरत तो नहीं है, हमको खून की जरूरत नहीं थी। उसके बाद भी वो हॉस्पिटल के आसपास घूमता रहा। जब हमने किराये का मकान लिया तो वहाँ भी आया। जो भी उसने किया सब प्लांटेड था।

पुलिस के अनुसार जब उन्होंने अनिल कुमार के बारे में जांच की तो उन्हें क्राइम सीन के पास दो पहिया गाड़ी मिली। इस गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर जांच के बाद पता चला कि ये लोग पठानकोट मिलिट्री कैंप में तैनात है। उसके बाद पुलिस वहाँ पहुंची जहाँ से।

और राजेश दोनों की पोस्टिंग थी और दोनों यहाँ से अब गायब हो चूके थे। पुलिस लगी जांच पड़ताल में पूर्ति से ये पता लगा लिया कि मर्डर क्यों हुआ, किसने किया? लेकिन उसके बाद भी मर्डर के इन दोनों आरोपियों को अरेस्ट नहीं कर पाई। 2006 की बात मैं कह रहा हूँ हम में से कितने लोग छोटे थे तब?

अब साल 2025, 19 साल बाद फरार होने के बाद घटना स्थल से 587 किलोमीटर दूर CBIने इन दोनों आरोपियों को अरेस्ट कर लिया। वो भी एआई यानी आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स की मदद से( LOCATION पुडुचेरी) से गए।

एक बार तो केस संभाल रहे अफसरों को भी लगा होगा कि शायद आरोपी देश छोड़कर भाग गए या फिर कहीं चले गए होंगे। लेकिन जब AI की मदद से इन लोगों की तस्वीरों को कुछ साल आगे बढ़ाकर देखा गया तो फिर से इनकी तलाश शुरू हुई और अंत में इनको पुडुचेरी से पकड़ लिया गया।

साल 2010 में। संतम्मा की अपील के बाद इस केस को CBIको सौंपा गया। साल 2013 में CBIने अपनी चार्जशीट बनाई, लेकिन दोनों मर्डर्स को तलाश नहीं पाई। ढूंढ नहीं पाई ये दोनों फरार रहे। तमिलनाडु की डी टी नेक्स्ट वेबसाइट के अनुसार इस दौरान दोनों ही मर्डर्स पुडुचेरी शिफ्ट हो गए।

उन्होंने अपनी पहचान बदल ली। दिविल बन गया विष्णु और राजेश बन गया प्रवीण कुमार। इतने सालों में इन दोनों ने यही शादी की। पिता बने प्रॉपर्टी भी खरीदी। सब कुछ अच्छे से चल रहा था इनके जीवन में, लेकिन अब आया AI और AI की मदद से आरोपियों को पकड़ा कैसे गया? केरल के एडी जीपी।

लॉ एंड ऑर्डर जो है। मनोज अब्राहम ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया, हमारी टेक्निकल इन्टेलिजेन्स विंग जो की पुराने पेंडिंग केस का डिजिटल एनालिसिस करती है, उन्होंने आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स से इन आरोपियों को ट्रैक किया।

आरोपियों की पुरानी फोटोस को डेवलॅप किया गया ये देखने के लिए कि वो 19 साल बाद कैसे दिखेंगे तब की फोटो ए आई के जरिए ये देखा गया कि ये लोग 19 साल बाद कैसे दिखते होंगे। कई OPTION TRY किए गए उनके हेयर स्टाइल से लेकर चेहरे के फीचर्स से लेकर तमाम चीजें मैच की गई।

AI की मदद से चेंज किए गए इन फोटोस को सोशल मीडिया पर पड़ी फोटोस से मैच कराया गया। AI द्वारा द्वारा निकाली गई फोटोज पूरी दुनिया की कई लोगों से मैच की गई लेकिन जो image Ai की इमेज से एक आरोपी फेसबुक पर जो शादी की फोटो थी उसे 90% मैच हुई हमने आगे की जांच की पुडुचेरी से राजेश को पकड़ लिया राजेश जब पकड़ा गया तो खुलासा हुआ राजेश दूसरे आरोपी डिबिल तक लेकर गया जिसकी रंजनी से संबंध थे और जिसने राजेश से कहकर रंजनी और उसके दोनों बच्चों की हत्या कराई थी क्योंकि case CBI के पास था पुलिस ने चेन्नई यूनिट को अलर्ट किया और उन्होंने इन दोनों को अरेस्ट किया और तब CBI को सौंप दिया गया आखिर अंत में साल 19 साल के लंबे इंतजार के बाद रंजीनी को न्याय मिला लेकिन आप सोचिए न्याय पाना इस देश में कितना मुश्किल है और कितना समय लगता है दो नवजात बच्चों की हत्या हुई भूल जाइए कि वह केरल में हुई या तमिलनाडु में जो कहीं भी देश के किसी भी इलाके में किसी भी कोने में हो और पुलिस जो आरोपियों को पकड़ नहीं पा रही थी वह खुद सेना में थे उसके बाद फरार हुए इतना बड़ा अपराध लेकिन आखिरकार जो तकनीक है उसने साथ दिया और कहते हैं कि पाप का घड़ा एक दिन जरूर फूटता है और इंसानों को उसके कर्मों का फल मिलता जरूर है 

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